उपमंडलाधिकारी नालागढ़ नरेंद्र अहलूवालिया की अध्यक्षता में उपमंडलाधिकारी कार्यालय के सभागार में पलासड़ा गांव स्थित किण्विन कंपनी द्वारा उत्पन्न जल एवं वायु प्रदूषण के समाधान के संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधि तथा विभिन्न पर्यावरण संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उपमंडलाधिकारी ने कहा कि हाल ही में हिम परिवेश संस्था नालागढ़, हिण्डूर पर्यावरण संस्था नालागढ़ तथा पलासड़ा गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के निवासियों द्वारा किण्विन कंपनी से उत्पन्न प्रदूषण के संबंध में एक संयुक्त ज्ञापन कार्यालय को प्रस्तुत किया गया था।
उन्होंने कहा कि प्राप्त ज्ञापन के अनुसार कंपनी द्वारा उपयोग किए जा रहे रासायनिक पदार्थों के अपशिष्ट का समुचित उपचार (ट्रीटमेंट) नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण जल एवं वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, साथ ही आसपास के निवासियों को दुर्गंध, पर्यावरणीय असंतुलन एवं संभावित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उपमंडलाधिकारी ने कंपनी प्रबंधन को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपनी उत्पादन क्षमता को तत्काल प्रभाव से उपलब्ध अपशिष्ट उपचार (ट्रीटमेंट) क्षमता के अनुरूप सीमित करें। उन्होंने कहा कि जब तक कंपनी के पास पर्याप्त एवं प्रभावी ट्रीटमेंट व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार का अतिरिक्त अथवा नया उत्पादन आरंभ नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में बिना उपचारित अपशिष्ट जल को खुले में अथवा नालों में प्रवाहित करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा तथा इसके उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस संदर्भ में कंपनी प्रबंधन द्वारा अवगत कराया गया कि समस्या के स्थायी समाधान हेतु आईआईटी रोपड़ के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र सिंह को तकनीकी परामर्श के लिए नियुक्त किया गया है। इस पर उपमंडलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कंपनी प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बद्दी के अधिकारियों तथा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर समयबद्ध तरीके से ठोस एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
बैठक के उपरांत उपमंडलाधिकारी नालागढ़ ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ किण्विन कंपनी का संयुक्त निरीक्षण भी किया तथा मौके पर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपमंडलाधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का प्रदूषण सहन नहीं किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी सभी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वे नियमित निरीक्षण करें और यदि किसी भी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्थानीय लोगों एवं पर्यावरण संस्थाओं को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनकी शिकायतों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है तथा पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।









